23 Sept 2021

शरभ तंत्रम

 

 

-पुस्तक              शरभ तंत्रम

-लेखक              श्री निवास शर्मा जी

-प्रकाशक          चोखम्वा सुरभारती प्रकासन वाराणसी

-पृष्ठसंख्या             356

-मूल्य                    400/-

 

 

एक कथा के अनुसार भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अवतार लिया और प्रह्लाद के पिता हरिनाय्कशिपू को मार डाला पर उसे मारने के बाद भी उनका गुस्सा शांत नहीं हुआ! देवी देवताओ के सभी उपाय विफल हो गए तो उन्होंने भगवान शिवजी से प्रार्थना की,काल के भी काल महादेव ने उस समय भगवान शर्भेश्वर का अवतार लिया और अपने पंजो में नरसिंह भगवान को पकड़ कर ज़मीन पर पटक दिया!ऐसा करने से भगवान नरसिंह शांत हो गए!भगवान नरसिंह ने शाम के समय अवतार लिया था उसी रात भगवान शिव ने अवतार लिया था! नरसिंह जयंती की अर्धरात्रि से शरभ जयंती मानी जाती है!

भगवान नरसिंह यदि किसी भी प्रकार शांत होने को तयार न हो तो शर्भेश्वर मन्त्र को जपना चाहिए! मेरे गुरुदेव का कहना था सभी अनिष्टो का नाश करने वाले भगवान नरसिंह है पर जिसने शर्भेश्वर मन्त्र को सिद्ध कर लिया उसके आगे तो भगवान नरसिंह भी हाथ बांधे खड़े रहते है! नरसिंह मन्त्र का यदि किसी पर मारण प्रयोग कर दिया जाये और वो व्यक्ति शर्भेश्वर मन्त्र का जानकर हो तो प्रयोग बिफल हो जाता है! इस मन्त्र का जितना भी गुणगान किया जाये कम है क्योंकि यदि इस मन्त्र को पढ़ कर कोई विशेष काम किया जाये तो उसमे निश्चित तौर पर सफलता मिलती है!आपके शत्रु आपसे आंख भी नहीं मिला सकते और जो शत्रुता रखते है उनका पतन शुरू हो जाता है!ऐसा मैने कई बार अनुभव किया है!साधारण शत्रु तो क्या?
अगर आपका शत्रु इन्द्र के सामान पराक्रमी हुआ तब भी उसका विनाश निश्चित है!यदि इस मन्त्र को जपते हुए आप शेर चीते या किसी हिंसक जंगली जानवर से नज़र मिला ले तो वो भी शांत होकर बैठ जायेगा!
भगवान शर्भेश्वर के बारे में बहुत कम लोगो को जानकारी है क्योंकि पुराणों में इस बात का जिक्र नहीं आता कि शरभ अवतार हुआ था! आज मै आपके सामने पक्षीराज शर्भेश्वर का एक गोपनीय प्रयोग लिख रहा हूँ! मुझपर बार बार आरोप लगाने वाले कि मै लोगो के मन्त्र चुराकर लिखता हूँ यह अच्छी तरह जानले यह
मन्त्र मुझे मेरे गुरुदेव सिद्ध रक्खा रामजी ने दिया है और मेरे गुरुदेव ने मुझे इतना ज्ञान तो दिया ही है कि मुझे चोरी करने कि कोई जरूरत नहीं है! जो लोग मुझपर आरोप लगा रहे है वो मेरे लिखे इस मन्त्र को यदि किसी ग्रन्थ या किसी और ग्रुप में लिखा हुआ दिखा दे तो मै जीवन भर उनकी गुलामी करने को तयार हूँ! मन्त्र इस प्रकार है!


 

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